बिजनौर कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा, 30 हजार जुर्माना

बिजनौर | नाबालिग बच्चियों के साथ यौन अपराधों को लेकर न्यायपालिका सख्त रुख अपना रही है। ऐसा ही एक उदाहरण बिजनौर की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने पेश किया है। कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को 10 साल की कठोर सजा सुनाते हुए 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
2018 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला अगस्त 2018 का है। मुजफ्फरनगर जिले के मीरापुर थाना क्षेत्र के मुझेडी गांव निवासी मोनू पुत्र जुल्फकार ने एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाकर दुष्कर्म किया था। पीड़िता के पिता की शिकायत पर किरतपुर थाने में FIR दर्ज की गई थी।
👮♂️ पुलिस और अभियोजन की प्रभावी कार्रवाई
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत केस दर्ज किया।
यह केस ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत चलाया गया, जिसमें थाना किरतपुर की पुलिस टीम और अभियोजन विभाग ने मिलकर मजबूत पैरवी की।
सभी जरूरी सबूत जुटाकर समय से कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। केस की निगरानी मॉनिटरिंग सेल के द्वारा की गई और सभी पहलुओं पर गहराई से काम किया गया।
⚖️ 18 जुलाई 2025 को सुनाया गया फैसला
लगभग 7 साल तक चली सुनवाई के बाद, 18 जुलाई 2025 को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट बिजनौर ने आरोपी मोनू को दोषी करार दिया और उसे 10 साल की सश्रम कारावास और ₹30,000 जुर्माना की सजा सुनाई।
निष्कर्ष:
बिजनौर कोर्ट का यह फैसला यह दर्शाता है कि नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। कानून अपना काम कर रहा है, और समाज में न्याय की भावना को मजबूती मिल रही है। इस केस से अन्य अपराधियों को भी एक कड़ा संदेश जाता है कि बलात्कार जैसे घिनौने अपराधों का अंजाम गंभीर होगा।






